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शुक्रवार

प्रार्थना भावार्थ (Hindi & English Translation)

🔷 संघ प्रार्थना – श्लोक 1

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।
महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते।।१।।

📜 हिन्दी भावार्थ:

हे वत्सल मातृभूमि! मैं तुम्हें सदा प्रणाम करता हूँ।
हे हिन्दुभूमि! तुमने मुझे सुखपूर्वक पाला-पोसा और आगे बढ़ाया है।
हे परम मंगलमयी पुण्यभूमि! तेरे लिए मेरा यह शरीर समर्पित हो।
मैं तुम्हें बारंबार नमन करता हूँ।

🌍 English Translation:

O loving Motherland! I bow to you always.
O Hindu land, you have nurtured me happily and prosperously.
O supremely auspicious and sacred land, may this body be dedicated to your cause.
I salute you again and again.

🔷 संघ प्रार्थना – श्लोक 2

प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता
इमे सादरं त्वां नमामो वयम्।
त्वदीयाय कार्याय बद्धा कटीयं
शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये।

📜 हिन्दी भावार्थ:

हे सर्वशक्तिमान प्रभु! हम हिन्दू राष्ट्र के अंगभूत घटक हैं, और आपको आदरपूर्वक प्रणाम करते हैं।
आपके कार्य के लिए हमने अपनी कमर कस ली है।
कृपया उस कार्य की पूर्ति के लिए हमें शुभ आशीर्वाद दीजिए।

🌍 English Translation:

O Almighty Lord! As integral parts of the Hindu Nation, we bow to you respectfully.
We have firmly resolved to carry out your mission.
Please grant us your divine blessings for its successful fulfillment.

🔷 संघ प्रार्थना – श्लोक 3

अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्ति
सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्।
श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्ण मार्गं
स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत्।।२।।

📜 हिन्दी भावार्थ:

हे ईश्वर! हमें ऐसी शक्ति दीजिए जो अजेय हो,
और ऐसा शील (चरित्र) दीजिए जिससे सम्पूर्ण विश्व विनम्र बन जाए।
साथ ही हमें वह ज्ञान और विवेक भी प्रदान करें,
जो स्वयं द्वारा स्वीकृत कांटों से भरे मार्ग को भी हमारे लिए सुगम बना सके।

🌍 English Translation:

O Lord! Grant us the invincible power that governs the universe,
and noble character that makes the world humble.
Also bless us with the wisdom to transform even the thorny paths,
which we have voluntarily accepted, into smooth roads.

🔷 संघ प्रार्थना – श्लोक 4

समुत्कर्षणाय श्रेयसस्यैकमुग्रं
परं साधनं नाम वीरव्रतम्।
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा
हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्रानिशम्।।

📜 हिन्दी भावार्थ:

ऐहिक और पारलौकिक कल्याण की प्राप्ति के लिए जो एकमात्र उत्कृष्ट और उग्र साधन है — वह है 'वीरव्रत'।
वह वीरव्रत हमारे अंतःकरण में स्फुरित हो।
हमारे हृदय में ध्येय के प्रति ऐसी ध्येयनिष्ठा सदा जाग्रत रहे,
जो अक्षय हो और दिन-रात तीव्रतापूर्वक प्रज्वलित बनी रहे।

🌍 English Translation:

The one and only supreme and intense means for attaining both worldly welfare and spiritual emancipation is known as ‘Veer-Vrat’ (heroic resolve).
May that spirit of Veer-Vrat arise in our hearts.
May our unwavering devotion to the ideal remain constantly kindled,
glowing day and night in the depths of our soul.

🔷 संघ प्रार्थना – अंतिम श्लोक 

विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिः
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम्।
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम्।।३।।

📜 हिन्दी भावार्थ:

हे प्रभु! हमारी संगठित कार्यशक्ति विजय प्राप्त करने वाली हो,
और वह शक्ति धर्म की रक्षा करने में समर्थ बनी रहे।
तेरे कृपापूर्वक आशीर्वाद से हम अपने स्वराष्ट्र को
परम वैभव की स्थिति तक ले जाने में पूर्णतः सक्षम हों।

🌍 English Translation:

May our united and victorious power of action be dedicated
to the protection of Dharma.
By your gracious blessings, may we become capable
of leading our own nation to its ultimate and supreme glory.


भारत माता की जय!

यह उद्घोष मातृभूमि के प्रति हमारी श्रद्धा, गौरव और समर्पण का सजीव प्रतीक है।

This exclamation is a living symbol of our reverence, pride, and total dedication to the Motherland.

🕉️ समापन विचार

“संघ प्रार्थना केवल कुछ पंक्तियाँ नहीं, बल्कि एक स्वयंसेवक के जीवन का घोष है।
यह राष्ट्रभक्ति, आत्मशक्ति और कार्यनिष्ठा की जीवंत ध्वनि है – जो हर शाखा में गूंजती है और हर मन में संस्कार भरती है।”

📖 प्रेरक वाक्य

“ध्येय के प्रति अडिग निष्ठा, संगठन के प्रति समर्पण और राष्ट्र के प्रति पूर्ण श्रद्धा — यही संघ प्रार्थना का सार है।”

1 टिप्पणी:

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