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शुक्रवार

🗣️ संघ प्रार्थना – मूल श्लोक

संघ प्रार्थना – सम्पूर्ण श्लोक

संस्कृत मूल पाठ एवं राष्ट्रभक्ति का संगम

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यह प्रार्थना प्रतिदिन शाखा में सामूहिक रूप से गाई जाती है। इसमें मातृभूमि के प्रति समर्पण, आत्मबल, संगठन, राष्ट्रवैभव और प्रभु-कृपा की भावना समाहित है।

👇 नीचे संघ की सम्पूर्ण प्रार्थना प्रस्तुत है, यह राष्ट्रभक्ति, संगठन, और आत्मबल की भावना से ओतप्रोत है।

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।
महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते।।१।।

प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता
इमे सादरं त्वां नमामो वयम्।
त्वदीयाय कार्याय बद्धा कटीयं
शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये।।

अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिं
सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्।
श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्ण मार्गं
स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत्।।२।।

समुत्कर्षनिःश्रेयस्यैकमुग्रं
परं साधनं नाम वीरव्रतम्।
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा
हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्रानिशम्।।

विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम्।
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम्।।३।।

निष्कर्ष: यह प्रार्थना केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि प्रत्येक स्वयंसेवक के लिए जीवन का मंत्र है। यह हमें सिखाती है कि कैसे अपनी मातृभूमि की सेवा में स्वयं को समर्पित कर एक वैभवशाली राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है। प्रतिदिन इस प्रार्थना का उच्चारण हमारे संकल्प को और अधिक सुदृढ़ बनाता है।