शतक — सौ वर्षों के संघर्ष, साधना और संगठन की यात्रा
एक स्वयंसेवक की दृष्टि से विचारपूर्ण समीक्षा
📅 प्रकाशित: 27 फरवरी 2026 | ✍ लेखक: एक स्वयंसेवक
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर भारतीय समाज में अनेक प्रश्न, जिज्ञासाएँ और संशय समय-समय पर उठते रहे हैं। कुछ लोग पूर्वाग्रह के साथ देखते हैं, तो कुछ खुले मन से समझने का प्रयास करते हैं। फिल्म शतक ऐसे ही जिज्ञासु मन के लिए एक दृश्य दस्तावेज़ के रूप में सामने आती है।
सौ वर्ष किसी भी व्यक्ति के जीवन में उपलब्धि माने जाते हैं। किसी संगठन के लिए, वह भी पूर्णतः गैर-सरकारी सहयोग के बिना, यह और भी असाधारण है। फिल्म इस शतकीय यात्रा को केवल उत्सव की दृष्टि से नहीं, बल्कि संघर्ष, प्रतिबंध और निरंतर साधना की प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करती है।
संघर्ष के अध्याय
फिल्म में उन घटनाओं को भी स्थान दिया गया है, जिन्हें लेकर दशकों तक दुष्प्रचार होता रहा। कश्मीर में संकट की घड़ी हो, दादरा-नगर हवेली का प्रसंग हो, या युद्धकाल में स्वयंसेवकों की भूमिका — इन प्रसंगों को बिना अतिरंजना के प्रस्तुत करने का प्रयास दिखाई देता है।
तीन बार लगे प्रतिबंधों का उल्लेख यह दर्शाता है कि संगठन ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी कार्यपद्धति नहीं छोड़ी। संघर्ष उसके इतिहास का अपवाद नहीं, बल्कि स्थायी तत्व रहा है।
राजनीति से दूरी
फिल्म का एक उल्लेखनीय पक्ष यह है कि यह संगठन और राजनीति के संबंध को सीमित संदर्भ में ही छूती है। 1980 में भारतीय जनता पार्टी के गठन या 2014 के बाद की राजनीतिक परिस्थितियों को मुख्य कथा नहीं बनाया गया। यह इस बात का संकेत हो सकता है कि फिल्म का केंद्र बिंदु संगठन का सामाजिक और सांस्कृतिक पक्ष है।
नेतृत्व और परंपरा
डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार, गुरु गोलवलकर और बाला साहेब देवरस जैसे प्रारंभिक नेतृत्व पर विशेष प्रकाश डाला गया है। बाद के सरसंघचालकों का सीमित उल्लेख यह दर्शाता है कि संघ की शक्ति व्यक्ति-विशेष नहीं, बल्कि परंपरा और विचार में निहित है।
संतुलित दृष्टि
एक स्वयंसेवक के रूप में यह फिल्म प्रेरक प्रतीत होती है। किंतु इतिहास को समझने के लिए बहु-दृष्टिकोण आवश्यक है। दर्शकों के लिए यह आवश्यक है कि वे इस प्रस्तुति को व्यापक संदर्भ में भी देखें और अध्ययन करें।
निष्कर्ष
शतक केवल एक संगठन का उत्सव नहीं, बल्कि विचार, अनुशासन और धैर्य की यात्रा का सिनेमा है। यह फिल्म उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है जो पूर्वाग्रह से परे जाकर समझना चाहते हैं।