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शुक्रवार

"How to Increase Regularity in Shakha? | Inspire, Involve & Build the Nation

🟠 शाखा में नियमितता कैसे बढ़ाएं?
आइए आत्मबोध और उत्तरदायित्व से जुड़ें! 🇮🇳

संघ की शाखा केवल एक आयोजन स्थल नहीं, बल्कि यह राष्ट्र सेवा, आत्मानुशासन और चरित्र निर्माण की एक जीवंत प्रयोगशाला है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि कई स्वयंसेवक नियमित क्यों नहीं आते? और कैसे हम शाखा में उनकी नियमितता बढ़ा सकते हैं?🤔

A close-up image of a green plant with dewdrops on its leaves.

👉 आइए जानें कुछ सरल लेकिन प्रभावी उपाय:

  • प्रेरणा दें, उद्देश्य स्पष्ट करें
    शाखा केवल खेल या परेड नहीं है — यह एक चरित्र निर्माण की प्रक्रिया है। नए स्वयंसेवकों को सरल भाषा में समझाएं कि शाखा आने से क्या लाभ होता है – शारीरिक विकास, बौद्धिक जागरण और सामाजिक समरसता।
  • निजी संपर्क बनाएँ
    एक मित्रवत कॉल, एक मुस्कान से भरा आमंत्रण या घर जाकर मिलना — ये छोटे कदम बड़े परिवर्तन ला सकते हैं। 'संपर्क ही संगठन है' — इस सिद्धांत को जीवन में उतारें।
  • उत्तरदायित्व सौंपें
    हर स्वयंसेवक को एक छोटी जिम्मेदारी दें — जैसे कि आज की प्रार्थना, खेल संचालन, घोष व्यवस्था आदि। जब कोई ज़िम्मेदार बनता है, तो उसका जुड़ाव अपने आप गहरा हो जाता है।
  • शाखा को जीवंत बनाएं
    हर शाखा में कुछ नवाचार लाएं — देशभक्ति गीत, प्रेरक कहानियाँ, वीडियो क्लिप्स, या विशेष अतिथि। आनंद और प्रेरणा का वातावरण ही नियमितता को बढ़ाता है। 🌱
  • साझा लक्ष्य तय करें
    हर सप्ताह या महीने का एक लक्ष्य बनाएं — जैसे "इस माह 5 नए स्वयंसेवक जोड़ना है", या "हर रविवार परिवार मिलन करना है"। जब उद्देश्य सामूहिक होता है, तो हर कोई जिम्मेदार महसूस करता है।

याद रखें – शाखा में नियमितता आदेश से नहीं, आत्मबोध और जुड़ाव से आती है। चलिए एक ऐसा वातावरण बनाएं, जहाँ हर स्वयंसेवक स्वयं प्रेरित होकर आए और राष्ट्रनिर्माण की इस साधना में सहभागी बने।

"संघ निर्माण का आधार – शाखा में नियमित स्वयंसेवक!"🚩

शनिवार

Understanding the Truth Behind Allegations on RSS – Bold & Honest Clarification

🚩 RSS पर लगने वाले आरोपों का तार्किक और तथ्यपूर्ण उत्तर

भारत के सबसे बड़े सांस्कृतिक राष्ट्रवादी संगठन "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ" (RSS) को लेकर वर्षों से कई तरह के मिथक और आरोप फैलाए जाते रहे हैं। विरोधी वर्ग या गलत जानकारी रखने वाले लोग अक्सर संघ के खिलाफ बिना तथ्यों के बयान देते हैं। लेकिन जब इन आरोपों को तर्क, इतिहास और प्रमाणों की कसौटी पर परखा जाए तो सत्य कुछ और ही निकलकर आता है। इस लेख में हम संघ पर लगाए जाने वाले प्रमुख आरोपों का स्पष्ट और तथ्य आधारित उत्तर प्रस्तुत कर रहे हैं:

1. "RSS बिना रजिस्ट्रेशन के संगठन है"

RSS एक सामाजिक-सांस्कृतिक आंदोलन है, जो समाज निर्माण में विश्वास रखता है। यह किसी पंजीकरण के दायरे में नहीं आता, क्योंकि यह न कोई राजनीतिक दल है, न लाभ कमाने वाली संस्था। संविधान ने हर नागरिक को स्वैच्छिक संगठन चलाने की अनुमति दी है। संघ के साथ जुड़े सभी सेवा कार्य जैसे सेवा भारती, विद्या भारती, संस्कार केंद्र इत्यादि विधिवत रजिस्टर्ड और पारदर्शी हैं।

2. "हिंदुओं पर अत्याचार होता है, तो RSS साथ नहीं देता"

RSS बाढ़, दंगे, विस्थापन जैसी हर आपदा में सबसे पहले पहुँचता है, लेकिन प्रचार से दूर रहता है। कश्मीरी पंडितों के पलायन से लेकर पश्चिम बंगाल की हिंसा तक — संघ के स्वयंसेवक ग्राउंड पर राहत और पुनर्वास कार्य करते दिखते हैं। फर्क सिर्फ यह है कि वे बैनर लेकर नहीं, भाव लेकर सेवा करते हैं।

3. "आजादी की लड़ाई में RSS का कोई योगदान नहीं था"

RSS के संस्थापक डॉ. हेडगेवार स्वयं 1921 और 1930 के असहयोग आंदोलनों में जेल गए थे। भारत छोड़ो आंदोलन (1942) के दौरान जब कांग्रेस का नेतृत्व जेल में था, तब RSS के कार्यकर्ता भूमिगत रहकर क्रांतिकारियों और जनता के बीच संपर्क का सेतु बने। राष्ट्रसेवा केवल लाठी चलाना नहीं — संगठन और अनुशासन से समाज को तैयार करना भी है।

4. "मोहन भागवत कहते हैं हिंदू-मुस्लिम एक हैं"

RSS भारत माता को सर्वोपरि मानता है। यदि कोई मुस्लिम या अन्य धर्मावलंबी भारत को मातृभूमि मानकर जीता है, तो संघ उसे शत्रु नहीं मानता। राष्ट्रवादी सोच रखने वाला हर नागरिक संघ की दृष्टि में समान है। लेकिन जो भारत को गाली देते हैं, राष्ट्रविरोधी बात करते हैं — संघ उनका खुला विरोध करता है।

5. "RSS का कोई लक्ष्य या विचार नहीं है"

RSS का स्पष्ट विचार है – भारत को अखंड, आत्मनिर्भर, और सांस्कृतिक रूप से गौरवशाली राष्ट्र बनाना। राम मंदिर आंदोलन, सेवा प्रकल्प, गौ-संरक्षण, आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा – यह सब संगठन के स्पष्ट लक्ष्य का ही हिस्सा हैं। हर शाखा में 'विचार' और 'व्यवहार' का प्रशिक्षण होता है।

6. "RSS के पास पैसों का कोई हिसाब नहीं"

RSS का कोई कॉर्पोरेट फंडर नहीं, कोई विदेशी एजेंसी नहीं। हर स्वयंसेवक अपनी आय का थोड़ा-सा हिस्सा मासिक रूप से देता है। कार्यक्रमों का पूरा खर्च स्थानीय कार्यकर्ताओं द्वारा पारदर्शी रूप से वहन किया जाता है। संघ का कार्य 'धन' पर नहीं, 'ध्यान और सेवा' पर आधारित है।

7. "RSS ब्राह्मणों को बदनाम करता है"

RSS न तो ब्राह्मणों के विरुद्ध है, न किसी जाति विशेष के। शाखा में सब एक समान होते हैं – वहाँ न कोई ऊँच होता है, न नीच। स्वयं डॉ. हेडगेवार ब्राह्मण होते हुए भी जातिवाद को त्याग कर राष्ट्र को सर्वोच्च मानते थे। संघ का उद्देश्य समाज में समरसता लाना है, भेद नहीं।

RSS न सत्ता का भूखा है, न शोहरत का। यह भारत के लिए खड़ा वो संगठन है जो बिना शोर किए, राष्ट्रनिर्माण की नींव रख रहा है। जो लोग संघ को नहीं समझ पाते, असल में वे भारत की आत्मा को नहीं समझते।
“जिसे RSS से नफ़रत है, वो शायद भारत की आत्मा से अपरिचित है।”

"Role of Youth in Nation Building – Perspective of the Swayamsevak"

राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका: एक स्वयंसेवक का दृष्टिकोण

हर महान राष्ट्र की नींव उसके युवाओं पर टिकी होती है। जिस समाज के युवा जागरूक, अनुशासित और राष्ट्रभक्त हों, वही राष्ट्र विश्व में गौरव प्राप्त कर सकता है। भारत की संस्कृति ने हमेशा युवाओं को शक्ति, सेवा और त्याग का प्रतीक माना है।

🔥 युवा ही शक्ति हैं

युवावस्था ऊर्जा, साहस, निडरता और बदलाव की प्रतीक होती है। यदि इस शक्ति को सही दिशा मिले तो राष्ट्र निर्माण की गति कई गुना बढ़ सकती है। विवेकानंद ने भी कहा था — "उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।"

"अगर देश को बदलना है, तो युवाओं को जागना होगा।"

🚩 स्वयंसेवक और युवा नेतृत्व

संघ का स्वयंसेवक एक आदर्श युवा का उदाहरण है — जो प्रतिदिन प्रार्थना से दिन की शुरुआत करता है, अनुशासन को जीवन में अपनाता है और समाज सेवा को ही अपने जीवन का उद्देश्य मानता है।

शाखा में खेलों, गीतों और विचारों के माध्यम से एक सकारात्मक और राष्ट्रनिर्माण की भावना युवाओं में विकसित की जाती है। साथ ही सहभोजन, उत्सव, शिबिर जैसे कार्यक्रमों में नेतृत्व कौशल भी निखरता है।

युवा और राष्ट्र निर्माण
"युवाशक्ति से बदलता है भारत का भविष्य..."

📚 शिक्षा + सेवा = राष्ट्र निर्माण

आज का युवा सिर्फ पढ़ाई तक सीमित न रहे, उसे अपने समाज और राष्ट्र की ज़रूरतों को समझना चाहिए। जब पढ़ा-लिखा युवा सेवा के क्षेत्र में उतरता है, तभी उसका ज्ञान राष्ट्र की उन्नति में लग पाता है।

एनएसएस, एनसीसी, बाल स्वयंसेवक गुट, और ग्राम विकास अभियानों में भागीदारी करके युवा समाज के साथ आत्मीय संबंध बना सकता है।

🌱 ऐतिहासिक दृष्टिकोण

1857 की क्रांति हो या स्वतंत्रता संग्राम— हर युग में युवाओं ने ही नेतृत्व किया। भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, खुदीराम बोस जैसे क्रांतिकारी युवाओं ने अपने जीवन को राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया।

आज का युग तकनीकी क्रांति का है, जहाँ युवा सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया में सक्रिय हैं। यही युवा यदि राष्ट्रविरोधी ताक़तों को उजागर करने और राष्ट्र गौरव बढ़ाने में लगें, तो भारत फिर विश्वगुरु बन सकता है।

🧭 चुनौतियाँ और समाधान

  1. 👉 पश्चिमी प्रभाव को अपनाते समय अपनी जड़ों को न भूलें।
  2. 👉 सोशल मीडिया की बजाय सामाजिक कार्यों को प्राथमिकता दें।
  3. 👉 हर युवा को एक संगठित शक्ति का हिस्सा बनना चाहिए, जैसे शाखा।
  4. 👉 सेल्फ ब्रांडिंग की जगह सामूहिक सेवा को महत्व दें।
  5. 👉 हर युवा को कम से कम एक राष्ट्र निर्माण प्रकल्प में जुड़ना चाहिए।

📌 प्रैक्टिकल कदम

👉 स्कूल-कॉलेजों में "राष्ट्र जागरूकता मंच" बनाएं।
👉 हर युवा महीने में एक दिन समाज सेवा को दे।
👉 टेक्नोलॉजी के माध्यम से ग्रामीण भारत के लिए समाधान विकसित करें।
👉 अपने आस-पास के बच्चों को शिक्षा देने का अभियान चलाएं।

🔚 निष्कर्ष

युवा केवल भविष्य नहीं, वर्तमान भी हैं। आज जो वे करेंगे, वही कल राष्ट्र की दिशा तय करेगा। संघ जैसी संस्थाओं का उद्देश्य इन्हीं युवाओं को सकारात्मक दिशा देना है।

"जब युवा जागेगा, तभी भारत भाग्यशाली बनेगा।"

🚩 अब समय है — शाखा से जुड़ने, सेवा से जुड़ने और राष्ट्र से जुड़ने का।

संघ व हिंदुत्व: प्रेरणादायक विचारों की सूची 📜

संघ और हिंदुत्व प्रेरणादायक विचार
संघ एवं हिंदुत्व से जुड़े प्रेरणादायक विचार ✨ — एक स्वयंसेवक

✨ संघ एवं हिंदुत्व से जुड़े प्रेरणादायक विचार ✨

📜 "हिंदू संस्कृति वह प्रकाश है जो पूरे विश्व को आलोकित कर सकता है।"
🕉️ "संघ व्यक्ति नहीं, विचार है।"
🔱 "हिंदुत्व जोड़ता है, तोड़ता नहीं।"
🚩 "हम एक संस्कृति, एक राष्ट्र हैं।"
📚 "संघ शिक्षा नहीं, संस्कार देता है।"
🧘 "ध्यान और धर्म से जीवन को साधो, यही हिंदुत्व है।"
🔥 "स्वदेशी ही स्वाभिमान है।"
🌍 "विश्वगुरु भारत पुनः जागेगा।"
📯 "अखंड भारत हमारा संकल्प है।"
🌄 "भारत का भाग्य पुनः जागृत होगा।"
🌼 "जो हिंदू नहीं सोच सकता, वह भारत को नहीं समझ सकता।"
🛕 "गर्व से कहो हम हिंदू हैं।"
🧭 "हिन्दू धर्म, जीवन जीने की सर्वोत्तम पद्धति है।"
📖 "ज्ञान के बिना चरित्र निर्माण असंभव है।"
🕯️ "अज्ञान अंधकार है, संगठन प्रकाश है।"
📢 "संघ सबका है, भेदभाव किसी से नहीं।"
🛡️ "हिंदुत्व हमारा स्वाभिमान है, झुकने की चीज़ नहीं।"
📿 "जो अपने धर्म को भूल गया, वो अपनी जड़ें खो बैठा।"
🪔 "हिंदू संस्कृति वह प्रकाश है जो पूरे विश्व को आलोकित कर सकता है।"
🏛️ "हिंदुत्व केवल पूजा पद्धति नहीं, संपूर्ण जीवन दर्शन है।"
🧠 "हिंदू विचारधारा, विज्ञान और विवेक से युक्त है।"
🪖 "जो राष्ट्र को धर्म से काटता है, वह उसे खोखला करता है।"
🎯 "हिंदुत्व शाश्वत है – समय से परे और काल से अजर।"
🧵 "हिंदू होना कोई सीमा नहीं, वह एक विराट चेतना है।"
🛕 "हिंदू मंदिर हमारी आस्था और इतिहास के स्तंभ हैं।"
📜 "हिंदू परंपरा – ऋषियों की वाणी, वीरों की कहानी।"
🌾 "गांव-गांव में गूंजे – भारत माता की जय।"
🔔 "हिंदुत्व का जागरण ही भारत की पुनः जागृति है।"
✊ "जो जाति संगठित नहीं है, वह मिट जाती है।"
🌳 "संस्कृति का संरक्षण ही राष्ट्र रक्षा है।"
🛡️ "संघ निर्माण का कार्य करता है।"
🧠 "चारित्रिक बल ही संगठन की नींव है।"
🌟 "संघ अनुशासन की पाठशाला है।"
📚 "राम, कृष्ण और शिव — हमारे आदर्श, हमारे पथप्रदर्शक।"
यही विचार हमारे जीवन को उद्देश्य देते हैं और राष्ट्र को एकत्व की ओर ले जाते हैं। इन्हें आत्मसात कर हम एक सशक्त और जागरूक भारत का निर्माण कर सकते हैं। - एक स्वयंसेवक
🕉️ ""संघ शिक्षा नहीं, संस्कार देता है।""

शुक्रवार

प्रार्थना भावार्थ (Hindi & English Translation)

🔷 संघ प्रार्थना – श्लोक 1

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।
महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते।।१।।

📜 हिन्दी भावार्थ:

हे वत्सल मातृभूमि! मैं तुम्हें सदा प्रणाम करता हूँ।
हे हिन्दुभूमि! तुमने मुझे सुखपूर्वक पाला-पोसा और आगे बढ़ाया है।
हे परम मंगलमयी पुण्यभूमि! तेरे लिए मेरा यह शरीर समर्पित हो।
मैं तुम्हें बारंबार नमन करता हूँ।

🌍 English Translation:

O loving Motherland! I bow to you always.
O Hindu land, you have nurtured me happily and prosperously.
O supremely auspicious and sacred land, may this body be dedicated to your cause.
I salute you again and again.

🔷 संघ प्रार्थना – श्लोक 2

प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता
इमे सादरं त्वां नमामो वयम्।
त्वदीयाय कार्याय बद्धा कटीयं
शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये।

📜 हिन्दी भावार्थ:

हे सर्वशक्तिमान प्रभु! हम हिन्दू राष्ट्र के अंगभूत घटक हैं, और आपको आदरपूर्वक प्रणाम करते हैं।
आपके कार्य के लिए हमने अपनी कमर कस ली है।
कृपया उस कार्य की पूर्ति के लिए हमें शुभ आशीर्वाद दीजिए।

🌍 English Translation:

O Almighty Lord! As integral parts of the Hindu Nation, we bow to you respectfully.
We have firmly resolved to carry out your mission.
Please grant us your divine blessings for its successful fulfillment.

🔷 संघ प्रार्थना – श्लोक 3

अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्ति
सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्।
श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्ण मार्गं
स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत्।।२।।

📜 हिन्दी भावार्थ:

हे ईश्वर! हमें ऐसी शक्ति दीजिए जो अजेय हो,
और ऐसा शील (चरित्र) दीजिए जिससे सम्पूर्ण विश्व विनम्र बन जाए।
साथ ही हमें वह ज्ञान और विवेक भी प्रदान करें,
जो स्वयं द्वारा स्वीकृत कांटों से भरे मार्ग को भी हमारे लिए सुगम बना सके।

🌍 English Translation:

O Lord! Grant us the invincible power that governs the universe,
and noble character that makes the world humble.
Also bless us with the wisdom to transform even the thorny paths,
which we have voluntarily accepted, into smooth roads.

🔷 संघ प्रार्थना – श्लोक 4

समुत्कर्षणाय श्रेयसस्यैकमुग्रं
परं साधनं नाम वीरव्रतम्।
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा
हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्रानिशम्।।

📜 हिन्दी भावार्थ:

ऐहिक और पारलौकिक कल्याण की प्राप्ति के लिए जो एकमात्र उत्कृष्ट और उग्र साधन है — वह है 'वीरव्रत'।
वह वीरव्रत हमारे अंतःकरण में स्फुरित हो।
हमारे हृदय में ध्येय के प्रति ऐसी ध्येयनिष्ठा सदा जाग्रत रहे,
जो अक्षय हो और दिन-रात तीव्रतापूर्वक प्रज्वलित बनी रहे।

🌍 English Translation:

The one and only supreme and intense means for attaining both worldly welfare and spiritual emancipation is known as ‘Veer-Vrat’ (heroic resolve).
May that spirit of Veer-Vrat arise in our hearts.
May our unwavering devotion to the ideal remain constantly kindled,
glowing day and night in the depths of our soul.

🔷 संघ प्रार्थना – अंतिम श्लोक 

विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिः
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम्।
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम्।।३।।

📜 हिन्दी भावार्थ:

हे प्रभु! हमारी संगठित कार्यशक्ति विजय प्राप्त करने वाली हो,
और वह शक्ति धर्म की रक्षा करने में समर्थ बनी रहे।
तेरे कृपापूर्वक आशीर्वाद से हम अपने स्वराष्ट्र को
परम वैभव की स्थिति तक ले जाने में पूर्णतः सक्षम हों।

🌍 English Translation:

May our united and victorious power of action be dedicated
to the protection of Dharma.
By your gracious blessings, may we become capable
of leading our own nation to its ultimate and supreme glory.


भारत माता की जय!

यह उद्घोष मातृभूमि के प्रति हमारी श्रद्धा, गौरव और समर्पण का सजीव प्रतीक है।

This exclamation is a living symbol of our reverence, pride, and total dedication to the Motherland.

🕉️ समापन विचार

“संघ प्रार्थना केवल कुछ पंक्तियाँ नहीं, बल्कि एक स्वयंसेवक के जीवन का घोष है।
यह राष्ट्रभक्ति, आत्मशक्ति और कार्यनिष्ठा की जीवंत ध्वनि है – जो हर शाखा में गूंजती है और हर मन में संस्कार भरती है।”

📖 प्रेरक वाक्य

“ध्येय के प्रति अडिग निष्ठा, संगठन के प्रति समर्पण और राष्ट्र के प्रति पूर्ण श्रद्धा — यही संघ प्रार्थना का सार है।”

🗣️ संघ प्रार्थना – मूल श्लोक

संघ प्रार्थना – सम्पूर्ण श्लोक

संस्कृत मूल पाठ एवं राष्ट्रभक्ति का संगम

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यह प्रार्थना प्रतिदिन शाखा में सामूहिक रूप से गाई जाती है। इसमें मातृभूमि के प्रति समर्पण, आत्मबल, संगठन, राष्ट्रवैभव और प्रभु-कृपा की भावना समाहित है।

👇 नीचे संघ की सम्पूर्ण प्रार्थना प्रस्तुत है, यह राष्ट्रभक्ति, संगठन, और आत्मबल की भावना से ओतप्रोत है।

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।
महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते।।१।।

प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता
इमे सादरं त्वां नमामो वयम्।
त्वदीयाय कार्याय बद्धा कटीयं
शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये।।

अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिं
सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्।
श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्ण मार्गं
स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत्।।२।।

समुत्कर्षनिःश्रेयस्यैकमुग्रं
परं साधनं नाम वीरव्रतम्।
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा
हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्रानिशम्।।

विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम्।
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम्।।३।।

निष्कर्ष: यह प्रार्थना केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि प्रत्येक स्वयंसेवक के लिए जीवन का मंत्र है। यह हमें सिखाती है कि कैसे अपनी मातृभूमि की सेवा में स्वयं को समर्पित कर एक वैभवशाली राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है। प्रतिदिन इस प्रार्थना का उच्चारण हमारे संकल्प को और अधिक सुदृढ़ बनाता है।

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