संघ शताब्दी:
एक सदी, एक संकल्प
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 गौरवशाली वर्षों की सेवा यात्रा का एक विशेष दस्तावेज़।
"परम वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रम... राष्ट्र को परम वैभव की ओर ले जाने का संकल्प ही हमारे 100 वर्षों की ऊर्जा है।"
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने अस्तित्व के 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। 'व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण' की इस यात्रा को सार्थक बनाने के लिए समाज के हर वर्ग तक पहुँचने हेतु विशेष कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की है। यह उत्सव नहीं, बल्कि एक नया संकल्प है।
शताब्दी वर्ष के प्रमुख आयाम
संघ शताब्दी (शताब्दी संकल्प)
100 वर्षों की यह यात्रा स्वयंसेवकों के निस्वार्थ भाव और राष्ट्र के प्रति उनके अटूट समर्पण का प्रतीक है। यह मुख्य बिंदु पूरे वर्ष के आयोजनों का केंद्र है, जो हमें आने वाले 100 वर्षों के लिए एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की नींव रखने के लिए प्रेरित करता है।
विजयादशमी उत्सव
शक्ति और संगठन के विचार को पुनर्जीवित करने वाला यह उत्सव इस वर्ष विशेष भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। 1925 में संघ की स्थापना इसी दिन हुई थी, इसलिए यह दिन संगठन की जीवंतता और 'अधर्म पर धर्म की विजय' के संकल्प को दोहराने का अवसर है।
व्यापक गृह संपर्क
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य विचारों को केवल शाखा तक सीमित न रखकर हर घर तक ले जाना है। स्वयंसेवक व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक परिवार तक पहुँच रहे हैं ताकि राष्ट्रवाद के संदेश को जन-जन तक पहुँचाया जा सके और समाज के हर नागरिक को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ा जा सके।
मंडल-बस्ती हिंदू सम्मेलन
संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए प्रत्येक बस्ती और मंडल में सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। यह स्थानीय हिंदू समाज को संगठित करने, उनकी समस्याओं को समझने और सामूहिक चर्चा के माध्यम से समाधान खोजने का एक महत्वपूर्ण मंच है।
प्रमुख जन गोष्ठी (प्रबुद्ध संवाद)
समाज के प्रबुद्ध वर्ग, विचारकों और प्रबुद्ध नागरिकों के साथ राष्ट्रीय मुद्दों पर सार्थक संवाद स्थापित करने के लिए जन गोष्ठियां आयोजित की जा रही हैं। यह बौद्धिक स्तर पर समाज को जागरूक करने और राष्ट्र निर्माण की दिशा तय करने का एक प्रयास है।
सामाजिक सद्भाव
संघ का मूल मंत्र सामाजिक समरसता है। इन बैठकों के माध्यम से जाति, पंथ और वर्ग के भेदों को मिटाकर समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भाईचारा और अटूट एकता स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि एक समरस और अखंड समाज का निर्माण हो सके।
शालेय विद्यार्थी कार्यक्रम (संस्कार केंद्र)
संस्कारित शिक्षा और राष्ट्र प्रेम। भावी पीढ़ी के चरित्र निर्माण के लिए स्कूली छात्रों हेतु विशेष संस्कार केंद्र और रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसका प्राथमिक उद्देश्य छात्रों में नैतिकता, अनुशासन, साहस और देशभक्ति के बीज बोना है।
युवा केंद्रित कार्यक्रम (युवा शक्ति)
देश की युवा शक्ति को सकारात्मक दिशा देने के लिए विशेष कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने, उद्यमिता (Entrepreneurship) के प्रति प्रोत्साहित करने और उन्हें सामाजिक कार्यों के प्रति जिम्मेदार बनाने पर मुख्य ध्यान दिया जा रहा है।
शाखा विस्तार
जहाँ समाज, वहाँ शाखा। शाखा ही संघ की शक्ति और व्यक्ति निर्माण की पाठशाला है। शताब्दी वर्ष का सबसे बड़ा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के हर गाँव, हर मोहल्ले और हर बस्ती तक शाखा का विस्तार हो, ताकि राष्ट्र सेवा का कार्य अनवरत चलता रहे।
शताब्दी वर्ष का संकल्प
यह केवल 100 वर्षों का लेखा-जोखा नहीं है, यह आने वाले 100 वर्षों के सशक्त भारत का रोडमैप है। आइए, राष्ट्र सेवा के इस पावन पर्व पर हम सभी संकल्प लें कि हम अपनी क्षमता अनुसार समाज और राष्ट्र के कल्याण में अपना सर्वोत्तम योगदान देंगे।
॥ संघ शक्ति कलियुगे ॥
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